यही है हर दिल का इरादा,
रुके हिंसा, तबाही और खून खराबा,
हर तरफ फैले भाईचारा…
बंदूक की नोंक पर शांति
तानाशाही
और पराधीनता के माहौल में लोग भयभीत होकर बाहरी तौर पर शांत नजर आ सकते हैं
लेकिन उनके मन में भारी उथल-पुथल मची है. तिब्बत और जिनझियांग सहित दुनिया
के बहुत से इलाके आज भी बंदूक से थोपी गई शांति के दैत्याकार साये में
रहने को मजबूर हैं. उन्हें कब तक अपने बुनियादी अधिकारों से वंचित रखा
जाएगा?
हमें यह
समझना होगा कि इंसानियत ही सबसे बड़ा धर्म है. मानव कल्याण की सेवा से बढ़कर
कोई धर्म नहीं है. भाषा, संस्कृति, पहनावे भिन्न-भिन्न हो सकते हैं, लेकिन
विश्व के कल्याण का मार्ग एक ही है. मनुष्य को नफरत का मार्ग छोड़कर प्रेम
के मार्ग पर चलना चाहिए.
FOR MORE VISIT: WORLD PEACE DAY 2012
Comments
Post a Comment