अगर भारत में क्रिकेट का नाम आते ही दिमाग में सचिन की छवि बनती है तो यहां हॉकी का दूसरा नाम मेजर ध्यानचंद हैं.
अगर क्रिकेट में लोग सर डॉन ब्रैडमैन को सबसे बेहतर खिलाड़ी मानते हैं और टेनिस में रॉड लेवर जैसा कोई नहीं हुआ तो हॉकी में कुछ ऐसा ही स्थान ध्यानचंद को हासिल है.
र्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद के शानदार प्रदर्शन के कारण भारत ने जीत हासिल की. हिटलर को जब यह पता लगा कि ध्यानचंद भारतीय सेना में नायक पद पर हैं, तो उसने उन्हें जर्मन सेना में फील्ड मार्शल बनाने की पेशकश तक कर डाली, पर ध्यानचंद ने विनम्रता के साथ यह प्रस्ताव ठुकरा दिया.
अगर क्रिकेट में लोग सर डॉन ब्रैडमैन को सबसे बेहतर खिलाड़ी मानते हैं और टेनिस में रॉड लेवर जैसा कोई नहीं हुआ तो हॉकी में कुछ ऐसा ही स्थान ध्यानचंद को हासिल है.
र्लिन ओलंपिक में ध्यानचंद के शानदार प्रदर्शन के कारण भारत ने जीत हासिल की. हिटलर को जब यह पता लगा कि ध्यानचंद भारतीय सेना में नायक पद पर हैं, तो उसने उन्हें जर्मन सेना में फील्ड मार्शल बनाने की पेशकश तक कर डाली, पर ध्यानचंद ने विनम्रता के साथ यह प्रस्ताव ठुकरा दिया.
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Dhyan Chand and His Hockey Stick
ध्यानचंद का गेंद पर जबर्दस्त नियंत्रण को देखकर हॉलैंड और जापान के अधिकारियों ने कई बार उनकी हॉकी स्टिक तोड़कर यह जानने का प्रयास किया कि स्टिक में कहीं कोई गड़बड़ तो नहीं है, पर ऐसा कुछ भी नहीं था.
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We all forget the great heroes.May there be many more Dhyanchands in India!!
ReplyDeleteHe is LEGENDARY!!!
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